थोड़ा रूमानी हो जायें

जगजीत सिंह कि गज़लों के कुछ अंश लिख रहा हूँ ।


नहीं मिलते हो तुम मुझ से तो सब हमदर्द हैं मेरे ,
ज़माना मुझ से जल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ ।


वो याद आए तो दिल तर्रनुम हो ,
दीद हो जाए तो फिर नज़र महके ।










Posted by :ubuntu at 1:33:00 AM  

1 comments:

himanshu said... 21/7/08 10:14 AM  

irshaad irshaad.....

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